Posts

मेरे पथ पर शूल बिछाकर दूर खड़े मुस्काने वाले - नरेन्द्र दीपक //

Image
 मेरे पथ पर शूल बिछाकर दूर खड़े मुस्काने वाले दाता ने संबंधी पूछे पहला नाम तुम्हारा लूंगा। आंसू आहें और कराहें ये सब मेरे अपने ही हैं चांदी मेरा मोल लगाए शुभचिंतक ये सपने ही हैं मेरी असफलता की चर्चा घर–घर तक पहुंचाने वाले वरमाला यदि हाथ लगी तो इसका श्रेय तुम्हे ही दूंगा। सिर्फ उन्हीं का साथी हूं मैं जिनकी उम्र सिसकते गुज़री इसीलिये बस अंधियारे से मेरी बहुत दोस्ती गहरी मेरे जीवित अरमानों पर हँस–हँस कफन उढ़ाने वाले सिर्फ तुम्हारा क़र्ज चुकाने एक जनम मैं और जियूंगा। मैंने चरण धरे जिस पथ पर वही डगर बदनाम हो गयी मंजिल का संकेत मिला तो बीच राह में शाम हो गई जनम जनम के साथी बन कर मुझसे नज़र चुराने वाले चाहे जितना श्राप मुझे दो मैं सबको आशीश कहूंगा । मेरे पथ पर शूल बिछाकर दूर खड़े मुस्काने वाले दाता ने संबंधी पूछे पहला नाम तुम्हारा लूंगा ।। ✍️✍️ लेखक - नरेन्द्र दीपक Youtube video -  Click Here

JNU Entrance Exam 2021 (Mock test - 16)

  JNUEE [ TS - 16 ] 100 of 100 points   1) आदिकाल कहने से किसी साहित्यिक विशेषता का बोध नहीं होता जब कि 'वीरगाथा काल' अभिधान से एक निश्चित प्रवृत्ति प्रकट होती है | 'आदिकाल' नामकरण हजारीप्रसाद द्विवेदी को प्रिय है, 'वीरगाथा काल' नाम आचार्य शुक्ल ने प्रस्तावित किया है |"- कथन किसका है ?  * 1/1 नंददुलारे वाजपेयी बच्चन सिंह रामस्वरूप चतुर्वेदी   सुमन राजे   2) 'स्वयंभू' को हिंदी का सबसे बड़ा कवि मानने वाले लेखक कौन है ?  * 1/1 रामकुमार वर्मा राहुल सांस्कृत्यायन   हजारीप्रसाद द्विवेदी मिश्रबन्धु   3) "दव का दाधा हो कूपल लेइ | जीभ का दाधा न पाल्हवइ ||"- किस ग्रंथ की पंक्तियाँ हैं ?  * 1/1 पृथ्वीराज रासो बीसलदेव रासो   कुमारपाल चरित कुमारपाल प्रतिबोध   4) "समग्र भारतीय साहित्य में हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसमें पश्चिमी आर्यों की रूढ़िप्रियता, कर्मनिष्ठा के साथ ही साथ पूर्वी आर्यों की भाव-प्रवणता, विद्रोही वृत्ति और प्रेम-निष्ठा का मणि-कांचन योग हुआ है |"- कथन किसका है ?  * 1/1 किशोरीदास वाजपेयी हजारीप्रसाद द्विवेदी   जार्ज ग्...

A list of Blog Posts (Playlist)

Show more

Follow us on Twitter

आपकी आगंतुक संख्या