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वीर शहीद

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पुलवामा में आज पाक ने ,
कायर करतूत कराई है ।
निहत्थे सैनिक दल के ऊपर ,
 विस्फोटक बरसाई है  ।।
चिथड़े चिथड़े बिखर गये तब , दृश्य विभित्स दिखाया है । अमर शहीद हुए चालीसों ,  सदमे में देश समाया है ।। क्षत विक्षत शव देख-देखकर ,   बलिदानी वीर सपूतों के दिल भी दहल गये होगें ,        तब अमरापुर के दूतों के ।। हुआ आज आतंकी हमला ,
  जन जन का खून है खौल रहा ।
समय सब्र  का रहा नहीं ,
        हर भारतवासी बोल रहा ।।
पाक प्रायोजित करतूतों का ,        मुंहतोड़ जवाब जरुरी है । छप्पन इंची सीने वाले ,       आपकी क्या मजबूरी है  ।। सवा अरब जन साथ हैं आपके ,  एसी करनी करदे तू , कट्टरपंथी कठमुल्लों की ,    कब्र खोद और भर दे तू ।। सर्जीकल स्ट्राइक एकबार की ,    इससे कुछ नहीं होना है । अबकी बार दिखादे दमखम ,   सम्पूर्ण सफाया करना है ।।

आज इन पंक्तियों को लिखने में भी आँसू आ रहे थे ;  निःशब्द
 😢😢अमरदीप






एक नसीहत

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ट्रेन में एक 18-19 वर्षीय खूबसूरत लड़की चढ़ी जिसका सामने वाली बर्थ पर रिजर्वेशन था ..
उसके पापा उसे छोड़ने आये थे। .
अपनी सीट पर बैठ जाने के बाद उसने अपने पिता से कहा "डैडी आप जाइये अब, ट्रेन तो दस मिनट खड़ी रहेगी यहाँ दस मिनट का स्टॉपेज है।" .
उसके पिता ने उदासी भरे शब्दों के साथ कहा "कोई बात नहीं बेटा, 10 मिनट और तेरे साथ बिता लूँगा, अब तो तुम्हारे क्लासेज शुरू हो रहे हैं काफी दिन बाद आओगी तुम।"
लड़की शायद अध्ययन कर रही होगी, क्योंकि उम्र और वेशभूषा से विवाहित नहीं लग रही थी ।
ट्रेन चलने लगी तो उसने खिड़की से बाहर प्लेटफार्म पर खड़े पिता को हाथ हिलाकर बाय कहा :-
"बाय डैडी.... अरे ये क्या हुआ आपको !
अरे नहीं प्लीज"
पिता की आँखों में आंसू थे।
ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ती जा रही थी और पिता रुमाल से आंसू पोंछते हुए स्टेशन से बाहर जा रहे थे।
लड़की ने फोन लगाया..
"हेलो मम्मी.. ये क्या है यार!
जैसे ही ट्रेन स्टार्ट हुई, डैडी तो रोने लग गये..
अब मैं नेक्स्ट टाइम कभी भी उनको सी-ऑफ के लिए नहीं कहूँगी.
भले अकेली आ जाउंगी ऑटो से..
अच्छा बाय..
पहुंचते ही कॉल करुँग…

फेरा और फेमा में अन्तर

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फेरा और फेमा में क्या अंतर होता है?
Amardeep Sahufeb. 06/2019  05:41 IST


FERA vs FEMA
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में विदशी मुद्रा बहुत ही सीमित मात्रा में होती थी; इस कारण सरकार देश में इसके आवागमन पर नजर रखती थी. सन 1973 में विदेशी विनिमय नियमन अधिनियम (FERA) पारित किया गया, जिसका मुख्य उद्येश्य विदेशी मुद्रा का सदुपयोग सुनिश्चित करना था. लेकिन यह कानून देश के विकास में बाधक बन गया था इस कारण सन 1997-98 के बजट में सरकार ने फेरा-1973 के स्थान पर फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) को लाने का प्रस्ताव रखा था. दिसम्बर 1999 में संसद के दोनों सदनों द्वारा फेमा पास किया गया था. राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद जून 1, 2000 को फेमा प्रभाव में आ गया था. फेरा क्या है?

फेरा कानून का मुख्य कार्य विदेशी भुगतान पर नियंत्रण लगाना, पूँजी बाजार में काले धन पर नजर रखना, विदेशी मुद्रा के आयात और निर्यात पर नजर रखना और विदेशियों द्वारा अचल संपत्तियों की खरीद को नियंत्रित करना था. इस कानून को देश में तब लागू किया गया था जब देश का विदेशी पूँजी भंडार बहुत ही ख़राब हालत में था. इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा के संर…

आषाढ़ का एक दिन || मोहन राकेश

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मोहन राकेशमेरी निजी वाल पर उपलब्ध
मोहन राकेश संचयन जन्म : 8 जनवरी 1925, अमृतसर, पंजाब भाषा:हिंदीविधाएँ:उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, डायरी, यात्रा वृत्तांतप्रमुख कृतियाँ:उपन्यास : अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आनेवाला कल
कहानी संग्रह : क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, पहचान तथा अन्य कहानियाँ, वारिस तथा अन्य कहानियाँ, नए बादल, मोहन राकेश की संपूर्ण कहानियाँ
नाटक : अषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे अधूरे
डायरी : मोहन राकेश की डायरी
यात्रा वृत्तांत : आखिरी चट्टान तक
निबंध संग्रह : परिवेश अनुवाद:मृच्छकटिक, शाकुंतलमसंपादन:सारिका, नई कहानीसम्मान:संगीत नाटक अकादमी (1968)निधन:3 जनवरी 1972, दिल्लीविशेष:मोहन राकेश नई कहानी आंदोलन के प्रमुख नायकों में रहे। उनकी अनेक कहानियों पर फिल्में भी बनीं। कहानी के अतिरिक्त उन्हें नाटक के क्षेत्र में अपरिमित सफलता मिली। हिंदी प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा इलाका हो जहाँ उनके नाटकों का मंचन न हुआ हो। खासकर ‘आषाढ़ का एक दिन’ और ‘आधे अधूरे’ को तो क्लासिक का दर्जा हासिल है।

पात्र अंबिका :
मल्लिका : कालिदास : दंतुल : मातुल : निक्षेप : विलोम : रंगिणी : संगिनी : अनुस्वार : अनुनासिक : प्रियंगुमंज…