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स्वतंत्रता संग्राम में कवियों , शायरों और लेखकों का योगदान || हिन्दी दिवस || स्वतंत्रता आंदोलन

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स्वाधीनता आन्दोलन में साहित्य की भूमिका यह सभी जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को हमारा देश स्वतंत्र हुआ। यह हमारे राष्ट्रीय जीवन में हर्ष और उल्लास का दिन तो है ही इसके साथ ही स्वतंत्रता की खातिर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों का पुण्य दिवस भी है। देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रांतिकारियों व आन्दोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गौरव गाथा हमें प्रेरणा देती है कि हम स्वतंत्रता के मूल्य को बनाये रखने के लिए कृत संकल्पित रहें।          प्रेमचंद की ‘रंगभूमि, कर्मभूमि’ उपन्यास, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का ‘भारत -दर्शन‘ नाटक, जयशंकर प्रसाद का ‘चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त‘ नाटक आज भी उठाकर पढि़ए देशप्रेम की भावना जगाने के लिए बड़े कारगर सिद्ध होंगे। वीर सावरकर की “1857 का प्रथम स्वाधीनता संग्राम” हो या पंडित नेहरू की ‘भारत एक खोज‘ या फिर लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ‘गीता रहस्य‘ या शरद बाबू का उपन्यास ‘पथ के दावेदार‘ जिसने भी इन्हें पढ़ा, उसे घर-परिवार की चिन्ता छोड़ देश की खातिर अपना सर्वस्व अर्पण कर...

कच्ची उम्र का पक्का प्यार || कहानी || AmardeepSahuDeep

  ए क नाम सुनते ही अचानक से दूसरी दुनिया में खो सी गई थी रिया। कॉलेज की जिंदगी का आखि‍री साल था, और गर्मी की सुबह पेपर देने जाते वक्त पुराने दिनों की याद उसे हमेशा की तरह आ ही गई थी । जब वह किशोरावस्था की चौखट पर जा कर खड़ी ही थी , उसे अपने रंग रूप पर थोड़ा -थोड़ा गुमान होने लगा था । उसकी उम्र से कुछ साल बड़े युवा लड़कों की निहारती आंखें, उसे इतना तो बता ही चुकी थी कि वह खूबसूरत है। जब भी वह कहीं जाती , लोग भीड़ में भी उसे निहारते.... कभी-कभी वह भी मन ही मन इतराती , तो कभी गंदी निगाहों से खुद को बचाती । लेकिन उसका मन कहीं जा कर अटका हो , ऐसा तो अब तक नहीं हुआ था । नजरें टिकी न थी किसी पे, पर नजरें कमाल थी सब ताकते थे उसको , वो बेमिसाल थी  एक रात चाची के घर बै ठ कर टीवी देख रही थी , उसी वक्त दरवाजे पर कोई आया था। दरवाजा खुला हुआ था। रिया ने झांक कर देखा, तो बाहर कोई रिश्तेदार या चाची का कोई जानने वाला बाहर दरवाजे पर खड़ा था। चाची ने उन्हें अंदर बुलाया। रिया को इस बात से कोई मतलब नहीं था , कि घर में कौ न आया है। उसे तो बस अपने फ़ेवरेट सीरियल दिया और बाती हम   देखने से म तल ...

Mujhe Banna Hai UPSC Topper/ मुझे बनना है UPSC टॉपर by Nishant Jain IAS

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  मुझे बनना है UPSC टॉपर by निशांत जैन  Sir Book PDF Download Mujhe Banna hai UPSC Topper Book PDF Download: अगर आप भी UPSC की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और आप चाहते हैं की आप कोई ऐसी बुक मिल जाये जिससे आपका अच्छा मार्गदर्शन हो सके तो आप बिलकुल सही स्थान पर हो. दोस्तों बहुत से Students का सपना होता है की वो भी UPSC के exams में Topper बने उसका भी नाम हो और एक अच्छी सिविल सर्विस उसको मिले. लेकिन बहुत बार उनको अच्छी guidance नहीं मिल पाने के कारण उनका ये सपना पूरा नहीं हो पाता है. तो दोस्तों ऐसे students के लिए हम आज एक बहुत ही अच्छी बुक का PDF लेकर आये हैं. जिसका नाम है मुझे बनना है UPSC टॉपर ये बुक IAS टॉपर निशांत जैन द्वारा लिखी गयी है. और उन्होंने आईएस में हिन्दी माध्यम से टॉप किया है. तो मुझे लगता है आपको ये बुक एक बार ज़रूर पढ़नी चाहिये. आप सभी आप इसका PDF नीचे दिए गए Download Button के माध्यम से Download कर सकते है. इस बुक में आपको क्या क्या पढ़ने और सीखने को मिलेगा उसकी हमने यहाँ एक लिस्ट बना दी है. ये लिस्ट आप सभी के लिए उपयोगी साबित होगी. ये बुक specially UPSC की तैयारी...

बन DySP लौटूँगा // motivational poem // UPSC, UPPCS, CSE #AmardeepSahuDeep

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आना-जाना छोड़ चुके पर्वों से नाता तोड़ चुके रखकर पत्थर अपने दिलों पर  घर से मुखड़े मोड़ चुके  किसका दिल करता है यारो  घर का सुख-चैन गँवाने को  फिर भी घर हम छोड़ आये हैं  जीवन सफल बनाने को  नैन में मां के बसता सपना  मैं अब काबिल बन जाऊं  कर-कर चिंता बूढ़ी हो गयी  कभी तो खुशियाँ दिखलाऊं बाप से मेरे चला न जाता  फिर भी काम को जाता है  मेरा खर्चा भिजवाने को रोज़ कमाकर लाता है  छत वो घर की टपक रही है  जिसके नीचे सोते हैं  जब-जब बाहर हुआ मेरिट से  मुझसे ज्यादा रोते हैं  पता है मुझको, पता है रब को  मेहनत में मेरी कमी नहीं  वो जीवन भी क्या जीवन  जिसमें किस्मत से ठनी नहीं  माना चलती कठिन परीक्षा  मेहनत मेरा हथियार है  गुरुओं से लेकर दीक्षा  अर्जुन रण को तैयार है  सब्र का मईया। बाँध न टूटे  गला किस्मत का घोटूँगा  चन्द महीने बाकी हैं बस  बन DySP लौटूँगा  ........ 

तारीख, फूल और तुम ।। Frdshp Poem ।। #AmardeepSahuDeep

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अ क्सर जिनसे हमारे दिल मिल जाते हैं  उनसे हम नहीं मिल पाते  जैसे किसी महीने की आखिरी तारीख नहीं मिल पाती अपने करीबी महीने की पहली तारीख से मिलने और बिछड़ने की दो तारीख़ों के बीच अटका हुआ एक रिश्ता  अकातर  अपूर्ण धूमकेतु सा ब्रह्मांड में तैर रहा है… ….रहेगा। और मुझसे टकराता रहेगा;बनके “धूप” “दर्पण” और कभी-कभी “तुम” मिलेंगे जब भी कभी किसी बंजर रेगिस्तान के मोड़ पर भरी हुयी आँखें फिर डबडबाकर छलक जायेंगी  और खिलेगा वो फूल जो अपने समय में नहीं खिल पाया था ।।                                                                                                                                                     ...

तारीख, फूल और तुम ।। अमरदीप साहू "दीप"।। #AmardeepSahuDeep

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अ क्सर जिनसे हमारे दिल मिल जाते हैं  उनसे हम नहीं मिल पाते  जैसे किसी महीने की आखिरी तारीख नहीं मिल पाती अपने करीबी महीने की पहली तारीख से मिलने और बिछड़ने की दो तारीख़ों के बीच अटका हुआ एक रिश्ता  अकातर  अपूर्ण धूमकेतु सा ब्रह्मांड में तैर रहा है… ….रहेगा। और मुझसे टकराता रहेगा, बनकर “धूप” “दर्पण” और कभी-कभी “तुम” मिलेंगे जब भी कभी किसी बंजर रेगिस्तान के मोड़ पर भरी हुयी आँखें फिर डबडबाकर छलक जायेंगी  और खिलेगा वो फूल जो अपने समय में नहीं खिल पाया था ।।                     -- अमरदीप साहू "दीप"

Happy Birthday Ishu (My Open Heart) // जन्मदिन मुबारक मेरे भाई // #AmardeepSahuDeep

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इस साल अपने भाई का जन्मदिन मनाने का सबसे अच्छा तरीका सोचा है  भाई के लिए हमारी शुभकामनाओं में से एक! भा ई/ सबसे वफादार मित्र -:  एक मिनट के लिए वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त बन जाता है और अगले मिनट वह हमारे घर का अनमोल खिलौना या मेरी शर्ट के पिछले हिस्से पर बर्फ डाल रहा है ऐसा शरारतें करने वाला लापरवाह। कभी-कभी तो उसके साथ खेलते हुए मैं गलती से जीत गया तो वो रोने लगता है फिर अगर वो जीत गया तो जबतक पूरे घर को बता नहीं देगा, चैन से बैठेगा नहीं। उसको जिताने के लिए हारना पड़ता है यही तो प्यार होता है एक बड़े भाई का छोटे भाई से। जब भी बाजार से कोई खाने वाली चीज आती पहले से ही दो भाग अलग-अलग भाग आते जिससे घर पर लड़ाई न हो अक्सर वो अपना हिस्सा खाने के बाद वो मेरे हिस्से से आधी खाता। हम सभी एक साथ बड़े हुए हैं, यादें बना रहे हैं, किले बना रहे हैं, मज़ाक कर रहे हैं और जीवन के कठिन समय में एक-दूसरे का समर्थन कर रहे हैं। जब आपके पास जश्न मनाने का कोई कारण होता है, तो आपका भाई आपका उत्साह साझा करने वाला पहला व्यक्ति होता है। यदि आपका दिन खराब है, तो आप जानते हैं...

गुलाबी बतख़ // कहानी // दीक्षा चौधरी

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 रेगिस्तानी गाँव की गलियां सुबह के दस बजे ही ख़ाली लग रही थीं। धूल उड़ाती गर्म लू की आवाज़ ऐसी लगती जैसे कोई आवारा लड़का सीटी बजाता हुआ पूरे गाँव में दौड़ रहा हो। मनल और उसकी सहेलियों ने अपने सारे खेल खिलौने समेटकर नीम की छाया में जमा दिए थे। कुल्फ़ी वाले की घंटी बजी तब वो सब अपना रोज़ का आख़िरी खेल खेल रही थीं। उस खेल में एक पुरानी साइकिल थी, और बहुत सारे शहरों के नाम जो उन्होंने अख़बार में पढ़े थे या टीवी और रेडियो पर सुने थे। खेल ये था कि मनल साइकिल चलाती हुई आती और पीछे काठी पर बैठी लड़की चिल्लाती - "बस आ गयी बस! जिस जिसको चलना है आ जाओ!" "कहाँ जाएगी बस?" सवारी बनकर खड़ी लड़कियों में से कोई पूछती। यहाँ काठी पर बैठी लड़की को उन सारे शहरों के नाम बोलने होते थे, जो उसे पता थे।  वो चिल्लाती - "बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, दिल्ली..."   "मुंबई... मुंबई... मुंबई..." मनल चिल्लाती। सब लड़कियां झट से साइकिल के पीछे कतार से काठी पकड़कर चलने लगतीं। उनमें से किसी को भी, किसी भी शहर की दूरी या रास्ता मालूम नहीं था। साइकिल के दो पहिये थे, जो सपनों जितने तेज़ दौड़ते थे। ए...

समाज निर्माण के सिक्के का एक पहलु स्त्री भी

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स्त्री   शक्ति   राष्ट्र   शक्ति   का   अभिन्न   अंग   होती   है   जिसे   सशक्त   और   शामिल   किये   बिना   कोई   भी   राष्ट्र   शक्तिशाली   नहीं   हो   सकता। महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता देने के क्रम में वर्तमान भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा महिलाओं को पुरुषों के बराबर अवसर प्रदान करने का प्रयास किया है जो सुरक्षा के पाँच पहलुओं पर आधारित एक व्यापक मिशन है। ये पाँच पहलू है- माँ एवं शिशु की स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, वित्तीय सुरक्षा, शैक्षणिक एवं वित्तीय कार्यक्रमों के माध्यम से भविष्य की सुरक्षा तथा महिलाओं की सलामती। इस प्रकार हम पाते हैं कि जब भी राष्ट्र को सशक्त करने की बात आती है तो महिला सशक्तीकरण के पहलू को अनदेखा नहीं किया जा सकता। किसी संस्कृति को अगर समझना है तो सबसे आसान तरीका है कि उस संस्कृति में नारी के हालात को समझने की कोशिश की जाए। किसी भी देश के विकास संबंधी सूचकांक को निर्धारित करने हेतु उद्योग, व्यापार, खाद्यान्न उपलब्धता, शिक्षा इत्यादि के स्तर के साथ ही ...

टूटा नहीं है हौसला असफल हुआ तो क्या हुआ // Amardeep Sahu Deep //

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 टूटा नहीं है हौसला असफल हुआ तो क्या हुआ । कुछ देर सूरज बादलों ने ढक लिया तो क्या हुआ । जिस दीप की लौ से हजारों दीप अब तक जल गए, वो आँधियों से जूझ कर बुझ भी गया तो क्या हुआ । दोनों बराबर हमसफ़र छोटा बड़ा कोई नहीं, वो भी ग़लत मैं भी ग़लत फिर मैं झुका तो क्या हुआ । जो साथ रहकर साथ का अहसास दे पाया नहीं, उससे अलग होकर अकेला भी हुआ तो क्या हुआ । हरगिज़ न सर अपना झुकाया झूठ के आगे कभी, यदि 'सत्य' की खातिर हमारा सर कटा तो क्या हुआ ।

माँ की ममता // Maa ki mamta // Amardeep Sahu Deep //

 वो आधे घन्टे थोड़ा और सो लेने देती है।  बचपने की आड़ में, मेरी लापारवाही छुपा लेती है  जब रहता हूँ सहमा सा या बिमार सा,  तो अपनी गोदी में मुझे सुला देती है। भूखा ना होने पर भी एक रोटी और खिला देती है। जब उदासीनता घेरे होती थी मुझे,  तो बन कर दोस्त मेरी सब गम भुला देती है  ना जाने कितने त्याग कर मुझे जीना सिखा देती है रहे वो एक पल दूर हो जाय तो सूनेपन का मतलब बता देती है जब खाते थे पापा की डांट फटकार,  तो ले सारे दोष अपने सर,मुझे बचा देती है  मेरी एक फरमाइस पे वो क्या क्या बना देती है  लग जाये छोटी सी चोट तो घर सर पे उठा लेती है  जब होता था फेल परीक्षा में मैं, तो रात-रात भर जग मुझे पढ़ा देती है  घर लौटने पर मुझको वो अपनी दुनिया बना लेती है, और स्टेशन पर मुझे छोड़ते समय वो आँसू बहा देती है।  कैसे बताऊँ तुम सब को प्यार का अर्थ मैं  अगर तुम्हें  जिंदगी की भाग दौड़ में उस माँ की याद नहीं आती है.  वो माँ ही है जो मुझे प्यार का मतलब समझा जाती है।  वो माँ ही है जो थोड़ा और देर तक जग लेने देती ह...

"साहू इलेक्ट्रीकल्स एण्ड स्टेशनरी शॉप" ममना

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 "साहू इलेक्ट्रीकल्स एण्ड स्टेशनरी शॉप" से सेवायें लेने के लिए आपका कतई दिल की अन्दरूनी गहराई से स्वागत है।। 😍 हमारे यहाँ बिजली/लाइट से संबंधित सभी सामान (LED bulb, TV, Cooler, WallFan, Ceiling Fan, Kit, Wire, Camera, Bluetooth, Headphones, & etc)(लगभग सब कुछ) बहुत ही कम दामों पर मिलता है।। कम दाम इसलिए हैं क्योंकि हम अपना सभी सामान दिल्ली, कानपुर की फैक्ट्री से लाते हैं।। देखो ऐसो है कि हमने तो अपनी बात रख दी अब आप कुछु भी सामान हमाये यहाँ से लेओ ता तुम्हें भी जा बात को प्रमाण मिल जेहे कि हाँ बिया बात ता सही आ।। ☺☺ आज हम आपसे प्यार से शालीनता से बात करेंगे आप कल दोबारा आओगे।। 😘 "हम ग्राहक और मेहमान को भगवान मानते हैं" कृपया एकबार सेवा का मौका अवश्य दें।। - आपका छोटा भाई देव साहू (छोटू दाऊ) #SAHU_ELECTRICALS_&_STATIONARY_SHOP_MAMNA #साहू_इलेक्ट्रीकल्स_एण्ड_स्टेशनरी_शॉप_ममना #SAHU_MARKET_MAMNA #साहू_मार्केट_ममना ▄︻̷̿┻̿═━一 ▄︻̷̿┻̿═━一 😍😘😍☺😍😘😍

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